Makar Sankranti Khichdi – मकर संक्रांति का त्योहार क्यु मनाया जाता है

Makar Sankranti Khichdi – मकर संक्रांति का त्योहार हमारे देश मे कई तरह से मनाया जाता हैै, अलग – अलग राज्यो के लोग अपने हिसाब से मकर संक्रांति के त्योहार को अलग – अलग तरिके से मनाया जाता है ।

मकर संक्रांति के त्योहार को लोग खिचड़ी तथा लोहड़ी के नाम से भी जाना जाता है । खिचड़ी के दिन से ही अलग – अलग राज्यो मे गंगा नदी के किनारे माघ मेला या गंगा स्नान का भी भव्य आयोजन होता है । कुम्भ के पहले स्नान का भी शुरुवात इसी दिन से होता है ।

 Makar Sankranti Khichdi

पर्व मकर राशि मे सुर्य की संक्रांति को ही मकर संक्रांति का नाम दिया गया है । इसी दिन सुर्य मकर राशि मे प्रवेश करता है , जैसे ही इस दिन सुर्य मकर राशि मे प्रवेश करता है उसी पल से खरमास खत्म होता है और अच्छे दिन शुरु हो जाते है । लोगो की मान्यता है कि खरमास मे कोई भी शुभ या नया कार्य नही किया जाता है तो बहुत सारे लोग खरमास के खत्म होने का इन्तजार करते रहते है और जैसे ही खरमास शुरु होता है वे अपने सारे नये कामो को करना शुरु कर देते है ।

Makar Sankranti Khichdi Festival

 Makar Sankranti Khichdi Festival

Makar Sankranti Khichdi एक ऐसा पर्व है जो धार्मिक अस्था के साथ – साथ हमारे सेहत से भी जुङा है । यह त्योहार कुछ रुप से किसानो से भी जुङा है क्युकि इस दिन माना जाता है कि फसल की कटाई भी शुरु हो जाती है ।

मकर संक्रांति के दिन लोग खिचड़ी , तील , गुङ , लाई , दही चुङा इत्यादी भी खाया जाता है । मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी और तील , गुङ का कुछ खास ही महत्व है ।

 Makar Sankranti Khichdi Festival

Khichdi पर्व किसने शुरु किया

खिचड़ी मनाने की परम्परा को शुरु करने वाले बाबा गोरखनाथ है , आपको बता दे बाबा गोरखनाथ को भगवान शंकर यानि शिव का अंश माना जाता है । पुराने समय की एक कहाँनी है जिसमे बताया जाता है कि खिलजी के आक्रमण के वजह से नाथ योगियो को खाना बनाने का समय नही मिल पाता था जिसके वजह से कई बार वे भुखे ही रह जाते थे । लगातार भुखे रहने की वजह से उनका शरीर दुर्बल और कमजोर हो गया था ।

नाथ योगियो को इस समस्या से निकालने के लिए बाबा गोरखनाथ ने दाल , चावल और सब्जी को एक ही मे मिक्स करके उसे पकाया । जो व्यंजन बन कर तैयार हुआ वह काफी पौष्टिक और स्वादिष्ट था जिससे नाथ योगियो के शरीर को तुरंत उर्जा मिली और इस व्यंजन का नाम बाबा गोरखनाथ ने खिचड़ी  रखा ।

बाबा गोरखनाथ का यह भोजन का तरिका उपयोगी था जिससे नाथ योगियो के शरीर को उर्जा मिलने लग गयी और वे खिलजी के आक्रमण से बच सके । खिलजी से मुक्ति मिलने के कारण गोरखपुर में मकर संक्रांति को विजय दर्शन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

इस दिन गोरखपुर शहर मे बाबा गोरखनाथ मंदिर मे भव्य मेले का आयोजन होता है , यह मेला इसी दिन शुरु होता है और करिब एक महिने तक चलता है । इस दिन देश -विदेशो से लोग बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाने आते है । इस दिन मंदिर मे बहुत ज्यादा लोग मौजुद होते है ।

वैसे आमतौर पर तो लोगो को भोजन मे खिचड़ी  खाना पसंद नही आता है लेकिन इस दिन का बना खिचड़ी का स्वाद ही कुछ खास होता है ।

Essay on Makar Sankranti Khichdi

मकर संक्राति के त्योहार मे छोटे बच्चो को स्कुल से निबंध यानी Essay लिखने को दिया जाता है , बहुत सारे लोगो को यह भी नही पता होता है कि यह पर्व क्यु मनाया जाता है । आप इस आर्टिक्ल को Essay मे भी लिख सकते है ।

अगर आपको हमारा यह आर्टिक्ल पसंद आया हो तो इसे अपने संगे समबंधियो और दोस्तो के साथ शेयर करिये और उनहे भी बताइये कि खिचड़ी पर्व कितना खास है ।

धन्यवाद

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